खेती से पैसा कैसे कमाएं – एक किसान की तरह सोचकर

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खेती से पैसा नहीं कमाया जा सकता — यह बात अक्सर वही लोग कहते हैं जिन्होंने खेती को कभी समझने की कोशिश नहीं की

सच यह है कि भारत में खेती आज भी मुनाफा देती है, लेकिन सिर्फ उन्हीं लोगों को जो खेती को आदत नहीं, योजना के साथ करते हैं। मेहनत आज भी हर किसान करता है, फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग सही दिशा में मेहनत करते हैं और कुछ लोग बिना दिशा के।

इस लेख में हम खेती को किसी किताब की तरह नहीं, बल्कि एक किसान की नजर से समझेंगे।

खेती में मुनाफा क्यों नहीं दिखता?

अधिकांश किसानों को लगता है कि नुकसान मौसम की वजह से होता है, या सरकार की वजह से, या बाजार की वजह से।
लेकिन असली वजह ज़्यादातर मामलों में गलत फैसले होते हैं।

एक ही फसल हर साल बोना, बिना सोचे खाद डालना, और फसल बेचते समय बाजार को न समझना — ये सब छोटे फैसले मिलकर बड़ा नुकसान बना देते हैं।

जब तक किसान यह नहीं समझता कि खेती में हर फैसला पैसा तय करता है, तब तक मुनाफा दिखाई नहीं देता।

सही फसल का चुनाव ही आधा मुनाफा तय करता है

खेती की शुरुआत खेत से नहीं, फसल के चुनाव से होती है।

बहुत बार किसान वही फसल बो देता है जो उसके आसपास के लोग बो रहे होते हैं। लेकिन हर खेत एक जैसा नहीं होता। मिट्टी, पानी और मौसम हर जगह अलग होता है।

जिस किसान ने अपनी जमीन को समझ लिया और उसी हिसाब से फसल चुनी, उसने आधी लड़ाई वहीं जीत ली।

मिट्टी की जांच क्यों जरूरी है?

मिट्टी की जांच को अक्सर समय और पैसे की बर्बादी समझा जाता है।
लेकिन बिना जांच के खाद डालना ऐसा है जैसे बिना बीमारी जाने दवा खाना।

₹300–₹500 की मिट्टी जांच यह बता देती है कि आपकी जमीन में क्या कमी है और क्या ज्यादा है। इसके बाद खाद डालना अंदाज़े पर नहीं, जानकारी पर आधारित होता है।

लंबे समय में यही आदत खेती को नुकसान से मुनाफे की ओर ले जाती है।

खाद और दवा का सही इस्तेमाल खेती को बचाता है

आज खेती का सबसे बड़ा नुकसान ज़्यादा खाद और ज़्यादा दवा है।

फसल उतना ही लेती है जितनी उसे ज़रूरत होती है। उससे ज़्यादा डालने से न तो उत्पादन बढ़ता है और न ही फायदा होता है। उल्टा खर्च बढ़ता है और जमीन खराब होती है।

समझदार किसान वही है जो सही समय पर, सही मात्रा में खाद देता है और बेवजह छिड़काव नहीं करता।

खेती को व्यवसाय बनाने के लिए हिसाब जरूरी है

अगर किसान को यह नहीं पता कि एक एकड़ की खेती में कुल खर्च कितना आया, तो मुनाफे की बात सिर्फ अनुमान बन जाती है।

बीज, खाद, मजदूरी, पानी, दवा — हर चीज़ का हिसाब होना चाहिए।
खेती का असली सच खेत में नहीं, कागज पर दिखता है।

जो किसान हिसाब रखता है, वही अगले साल बेहतर फैसला कर पाता है।

एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा है

खेती में सबसे बड़ा खतरा यह है कि सब कुछ एक ही फसल पर टिका हो।

मौसम खराब हुआ या दाम गिर गए, तो पूरी साल की मेहनत पर पानी फिर जाता है। इसलिए आज समझदार किसान खेती के साथ छोटे-छोटे दूसरे काम भी जोड़ रहा है।

दूध, सब्ज़ी, नर्सरी या मुर्गी पालन — ये सब खेती को सहारा देते हैं।

सरकारी योजनाएं खेती का सहारा बन सकती हैं

कई किसान सरकारी योजनाओं से दूर रहते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह बहुत जटिल है।

लेकिन सच्चाई यह है कि सही जानकारी हो तो ये योजनाएं खेती का जोखिम काफी कम कर देती हैं। समस्या योजना की नहीं, जानकारी की है।

जो किसान योजनाओं को समझ लेता है, उसके लिए खेती थोड़ा आसान हो जाती है।

खेती बदलने के लिए सोच बदलनी होगी

खेती कोई जादू नहीं है और न ही रातों-रात अमीर बनने का तरीका।

लेकिन जब किसान यह तय कर लेता है कि वह हर काम सोच-समझकर करेगा, तभी खेती बदलती है।

यह वेबसाइट इसी सोच के साथ बनाई जा रही है — ताकि किसान खुद फैसला ले सके, किसी के कहने पर नहीं।

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